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Politics - Elections 2019

तमिलनाडु में हुई एक हत्या, जानिए अभी क्यों लोकतंत्र नहीं पड़ा खतरे में

by IRC-ADMIN - Apr 15 2019 11:29AM

देश की तथाकथित सोशल ब्रिगेड अभी खामोश है। एक व्यक्ति की हत्या कर दी गयी लेकिन "देश खतरे में है" ऐसा बोलने वाले अभी अपने घरों में आराम कर रहे हैं। तमिलनाडु से एक ऐसी खबर आई है जिसको खबर आई है जिसको देखने के बाद हमारे देश के अंदर दो मुंहे लोगों की स्थिति के बारे में पता चलता है। इन लोगों द्वारा सिर्फ एक तथाकथित धर्म के आधार पर यह बोल दिया जाता है कि इस देश के अंदर एक समुदाय डरा हुआ है। यह देश अब रहने लायक नहीं बचा लेकिन तमिलनाडु के अंदर इतनी बड़ी घटना हो जाती है और इस पूरे ब्रिगेड को तो बिल्कुल हवा नहीं लगती।

खबर है कि तमिलनाडु के अंदर एक वृद्ध व्यक्ति को सिर्फ इसलिए मार दिया गया क्योंकि वह भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री मोदी के पोस्टर लगाकर घूम रहा था। वह भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रचार कर रहा था। मारने वाले भी उसी पार्टी और गठबंधन के समर्थक हैं जो देश को लिंचिंगस्तान कहते हैं। यह बौद्धिक असहिष्णुता स्पष्ट रूप स्पष्ट रूप से बताती है कि हमारे देश के अंदर झूठी हवा फैलाने वालों ने किस प्रकार से दो मुहा रवैया अपनाया है है रवैया अपनाया है है।

■ क्या है मामला : 

74 साल के गोविंद राजन प्रधानमंत्री मोदी के समर्थक थे। तमिलनाडु के अंदर AIADMK और BJP के गठबंधन के समर्थक गोविंद राजन प्रधानमंत्री मोदी और AIADMK के नेताओं की तस्वीर अपनी पोशाक पर लगाकर NDA गठबंधन के लिए वोट मांग रहे थे। एक लोकतंत्र की विशेषता यह होती है कि यहां आप अपनी पार्टी या गठबंधन के लिए खुले तौर पर वोट मांग सकते हैं। उन का प्रचार कर सकते हैं। लेकिन जिन्हें लोकतंत्र पर भरोसा ही ना हो वह सीधे इसी प्रकार की हिंसा पर उतर आते हैं।

जब DMK और कांग्रेस के गठबंधन के समर्थकों को यह पता चला कि गोविंद राजन ऐसे प्रचार कर रहे हैं तो उन्होंने पहले तो गोविंद राजन को धमकाया और उसके बाद उनके साथ मारपीट भी की। जानकारी के लिए आपको बता दें कि 75 वर्षीय गोविंदराजन ओरथानाडू में NDA गठबंधन के लिए वोट मांग रहे थे। उनकी पोशाक पर प्रधानमंत्री मोदी और जयललिता की तस्वीर थी। पुलिस ने यह बताया है कि गोविंदराजन एआईएडीएमके के संस्थापक एमजी रामचंद्रन के बहुत बड़े प्रशंसक थे। इसी एक बात को डीएमके और कांग्रेस के गठबंधन के समर्थक सहन नहीं कर पाए हैं।

■ पुलिस ने किया खुलासा : 

पुलिस ने खुलासा किया कि उस क्षेत्र में प्रचार के दौरान गोविंद राजन के साथ मारपीट हुई। कांग्रेस और डीएमके के समर्थकों ने सबसे पहले गोविंदराजन के साथ बहस शुरू कर दी। एक प्रखर वक्ता और लोकतंत्र पर विश्वास रखने वाले गोविंद राजन ने उन सभी के सवालों का जवाब दिया लेकिन समय के साथ वृद्ध हो चुके शरीर ने उनका साथ नहीं दिया और वह उन गुंडों के साथ लड़ाई नहीं कर पाए। इस हिंसा को करने वाले का नाम गोपीनाथ बताया जा रहा है। गोपीनाथ को तमिलनाडु पुलिस द्वारा शनिवार को ही गिरफ्तार कर लिया गया और कोर्ट में हाजिरी लगाई गई जहां उसे पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। गोपीनाथ काँग्रेस और DMK गठबंधन समर्थक है।

गोविंद राजन शरीर पर लगे हुए ज़ख्मों को अधिक देर तक सहन नहीं कर पाए ,अस्पताल में ही 9:00 बजे उनकी मृत्यु हो गई। इस खबर के आने के बाद भारतीय जनता पार्टी और एआईएडीएमके के समर्थक काफी नाराज हैं। उनका यह कहना है कि एक लोकतंत्र के अंदर सभी को अपनी बात रखने का अधिकार होता है। यदि इस प्रकार से किसी एक व्यक्ति की जान सिर्फ दूसरे गठबंधन के समर्थन के लिए ले ली जाएगी तो यह लोकतंत्र के ऊपर बहुत बड़ा कुठाराघात होगा।

■ लिबरलो, सेक्युलरों और इंटेलेक्चुअलो में जबरदस्त फैली हुई शांति : 

इस देश के अंदर मारपीट और मॉब लिंचिंग जैसी शब्दों का इस्तेमाल करने वाले हमारे देश के लिबरल बुद्धिजीवी और सेक्यूलर इस समय इस खबर पर शांत बैठे हुए हैं। विभिन्न मीडिया चैनलों और पोर्टल द्वारा इसकी रिपोर्टिंग भी की गई। वहीं बाकायदा बताया गया कि गोविंद राजन प्रधानमंत्री मोदी और एआईएडीएमके के समर्थक थे। जिन्हें कांग्रेस और डीएमके के समर्थकों ने मारा। लेकिन इस पर उनकी चुप्पी ऐसी बंधी हुई है जैसे उन्हें इसके बारे में कुछ पता ही नहीं। बिना आग केभी धुआं उठा देने वाले ऐसे लोग आज इतना बड़ा कांड हो गया लेकिन शांत बैठे हुए हैं। क्या इसको उनका दोगलापन ना कहा जाए? क्या इसको उनके द्वारा एक राजनीतिक बिरादरी को समर्थन के लिए आंख बंद कर लेने वाली बात ना कहीं जाए? देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही घटनाओं को एक तथाकथित समुदाय से जोड़कर देश के अंदर डर फैलाने वाले इन बुद्धिजीवियों को आखिर देशद्रोही क्यों ना जाए? जेएनयू केंपस के अंदर बैठे इन लोगों द्वारा जब देश की स्थिति पर सवाल जवाब करो तो इन के लिए हर चीज वहीं से खराब हुई जहां से 2014 का चुनाव शुरू हुआ। उससे पहले जैसे सब कुछ सही था। तराजू का एक पलड़ा भारी रखने वाले ऐसे लोग कभी भी न्यूट्रल तो हो ही नहीं सकते।

■ पूछता है IRC : 

IRC हमारे देश की जनता से एक सवाल पूछता है। क्या हमारे देश के अंदर राजनैतिक इम्यूनिटी हासिल करने के लिए हर प्रकार की सीमा को तोड़ दिया जाएगा। हमारे देश के अंदर जिस प्रकार का बौद्धिक आतंकवाद फैलाया जा रहा है, इसको हमारे देश की जनता किस प्रकार सहेगी। बौद्धिक आतंकवाद उसको कहते हैं जहां आप की विचारधारा से इत्तेफाक ना रखने वाले व्यक्ति को आप अपनी बात रखने ही नहीं देते। उल्टा हिंसा करने वालों की भर्त्सना करने में भी आप दो मुहा रवैया दिखाते हैं। आखिर क्यों बॉलीवुड के कुछ तथाकथित लिबरल इस पर कोई चिट्ठी नहीं लिख रहे हैं। आखिर क्यों प्लेकार्ड का खेल अभी तक शुरू नहीं हुआ। स्टैंड अप कॉमेडी करके लोगों को हंसाने वाले तथाकथित लिबरल कॉमेडियंस आखिर क्यों ट्विटर पर इस एक घटना पर चुप है। उससे भी बड़ी बात है कि संविधान को बचाने की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले महा गठबंधन के नेता इस पर क्या सिर्फ इसलिए चुप है क्योंकि यह उनके एजेंडे को सूट नहीं करता। IRC आपसे यह सवाल पूछता है कि आखिर किस प्रकार की राजनीति है। जहां एक व्यक्ति के खिलाफ आपकी नफरत समझी जा सकती है लेकिन कम से कम उसका समर्थन कर रहे एक 75 वर्षीय वृद्ध के साथ इस प्रकार का व्यवहार निश्चित रूप से भर्त्सना का कारण है। जो इन लोगों द्वारा की नहीं जा रही। इनकी भर्त्सना से कुछ बदल नहीं जाएगा लेकिन कम से कम यह तो समझ में आएगा कि इन का तराज़ू बराबर है। यह करने में भी पता नहीं क्या दिक्कत है।

◆ आखिर क्यों गोविंद राजन अखलाक और जुनैद की लिस्ट में नहीं आते?
◆ क्या लोकतंत्र की हत्या करने वाले लोग संविधान बचा सकते हैं?
◆ बॉलीवुड क्यों चुप है? क्या उसे यह इनटॉलेरेंस नहीं दिखता?
◆ देश के बुद्धिजीवियों को सांप सूंघ गया?

यह कुछ ऐसे सवाल हैं जिनको इन लोगों को जवाब देना पड़ेगा म इस देश के अंदर विभिन्न रूप से एक राजनैतिक पार्टी के समर्थकों को भक्त बोल उनका मजाक उड़ाने वाले यह लोग क्या अब कांग्रेस और DMK के समर्थकों को आतंकवादी बोलेंगे? इंतज़ार रहेगा

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