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एक भारतीय की अपने देशवासियों से अपील, “हमारा देश खतरे में है, प्लीज इसे राहुल गाँधी से बचा लीजिये”

by Abhishek Baranwal - Mar 26 2019 5:03PM

अंग्रेजी में एक कहावत है, “किसी भूखे को एक मछली दे दो, वो उस दिन भूखा नहीं सोएगा. उसी भूखे को मछली पकड़ना सिखा दो, वो कभी भूखा नहीं सोएगा”. 70 साल के कांग्रेस राज में, हमेशा पहला वाला सिद्धांत ही लागू किया गया. जब भी वोट की जरुरत पड़ी, भूखे को मछली दे दी गयी, उसने वोट दिया और उसके बाद वो भूखा अगले चुनाव तक भूखा ही सोया.

प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरा सिद्धांत अपनाया. हर गरीब को घर देने पर काम किया, शौचालय दिए, गैस दिया, मुद्रा योजना से स्वरोजगार और आत्मविश्वास से जीने को प्रोत्साहित किया. नतीजा ये हुआ कि पहली बार अब भारत में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों में भारी कमी आई और हमारा देश अब दुनिया में सबसे ज्यादा गरीबों वाला देश नहीं रह गया है. ये बात वर्ल्ड बैंक की संस्था ब्रूकिंग्स इंटरनेशनल ने बतायी है. यहाँ पढ़ें.

इस तरह के काम करने के कारण कांग्रेस को अपना भविष्य हमेशा के लिए ख़तम होता नज़र आया और अब, राहुल गाँधी अपनी प्रधानमंत्री बनने की जिद के कारण एक ऐसा वादा लेकर आये हैं जिससे वो चुनाव तो जीत सकते हैं, लेकिन देश बर्बाद हो जाएगा. 5 करोड़ गरीब परिवारों को सम्मान से जीना सिखाने की जगह वो  उनको सालाना 72000 रुपये देंगे. इसका देश पर आर्थिक बोझ करीब 3.6 लाख करोड़ सालाना पड़ेगा जो कि हमारे रक्षा बजट से भी ज्यादा है. ये हमारे देश के स्वास्थ्य बजट से ज्यादा है. ये हमारे देश के शिक्षा बजट से ज्यादा है. ये हमारे देश के सालाना बजट का 14% है. इतना ही नहीं, ये स्कीम दुनिया के बहुत सारे देशों में लगाने की कोशिश की गयी और हर जगह ये फेल ही हुई है क्योंकि हर किसी को ये समझ आ गया कि इस स्कीम के कारण उनका देश बर्बाद हो जाएगा. यहाँ पढ़ें.

अब आप ज़रा सोचिये, ये स्कीम अगर लग गयी तो क्या होगा?
1. जो गरीब आज काम करके मुख्य धारा में शामिल होना चाहता है, वो काम ही नहीं करेगा क्योंकि घर बैठे ही पैसे मिलेंगे
2. टैक्स भरने वालों पर टैक्स का बोझ बढाया जाएगा. जिसके लिए उन्हें और अधिक महनत करनी पड़ेगी. वह ईमानदारी से टैक्स भरते हैं ताकि अपने परिवार, अपने बच्चों, और अपने देश, हर किसी के लिए कुछ ना कुछ करें. इस स्कीम के कारण वह बर्बाद हो जाएँगे. मतलब, इससे ये होगा कि इस देश में हर कोई धीरे धीरे एक बराबर हो जाएगा, हर कोई गरीब हो जाएगा
3. हम देश में लोगों को स्वास्थ्य सेवा ठीक से नहीं दे पाएँगे
4. हम देश में लोगों को शिक्षा सेवा ठीक से नहीं दे पाएँगे
5. हम देश की रक्षा करने के लिए हथियार नहीं खरीद पाएँगे और ना ही बना पाएँगे
6. मजदूरों की कमी के कारण देश का विकास नहीं हो पाएगा. सड़क, बिल्डिंग, पुल, रेलवे, कोई काम नहीं हो पाएगा
7. ......और सबसे बड़ी बात, इस देश में महंगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ जाएगी जिसको हम बर्दाश्त नहीं कर पाएँगे. जब विकास नहीं होगा, जीडीपी गिर जाएगी और महंगाई बढ़ जाएगी तो आप खुद सोचिये, क्या ये देश बर्बाद नहीं हो जाएगा?

मैं ये सब आप लोगों को डराने के लिए नहीं कह रहा हूँ. ये असल में हुआ है. मुझे बताने की जरुरत नहीं है कि कैसे मनमोहन सरकार में महंगाई दर 12% से ज्यादा पहुँच गयी थी. मुझे बताने की जरुरत नहीं है कि कैसे मनमोहन सरकार में देश के पास अपनी रक्षा करने के लिए हथियार खरीदने के पैसे नहीं थे. इनके परिवार की नीतियों के कारण देश को अपना सोना गिरवी रखने की नौबत आ गयी थी. अब क्या देश को बेचने की तैयारी है?

सबसे बड़ी बात, इस तरह की स्कीम लगाने के कारण दुनिया का एक देश पूरी तरह बर्बाद हो चुका है. उस देश का नाम है वेनेज़ुएला. आज वेनेज़ुएला में वहां की मुद्रा कूड़े के भाव में है. एक किलो चिकन का दाम करीब 98 लाख बोलिवार (वेनेज़ुएला की मुद्रा) है. देखिये ये विडियो.



आज वेनेज़ुएला के लोग गटर का पानी पीने को मजबूर हैं. देखिये ये विडियो.


गूगल करिए और देखिये आज वेनेज़ुएला की आर्थिक हालत कैसी है? गूगल करिए और देखिये कि आज से 10 साल पहले वेनेज़ुएला कितना संपन्न देश था.

एक झूठ जो राहुल गाँधी हर जगह फैलाते हैं, और जिसको आधार बना कर वो देश को बर्बाद करने वाली ये स्कीम लेकर आये हैं, वो ये है कि इस सरकार ने 15 सबसे अमीर लोगों का 3.5 लाख करोड़ माफ़ कर दिया है. वो बहुत धूर्त तरीके से आप सबसे ये छुपा लेते हैं कि वो क़र्ज़ माफ़ी नहीं है. उसको बैंकिंग की भाषा में राइट-ऑफ कहते हैं. ऐसा हर साल होता है क्योंकि बैंकों को अपनी बैलेंस शीट में प्रबंधन करना पड़ता है. सालों से ये होता आया है. इसका मतलब ये नहीं है कि उन लोगों से कर्जा का पैसा वापस नहीं वसूला जाएगा. क़र्ज़ वसूली की प्रक्रिया चलती रहती है और क़र्ज़ का पैसा वसूला जाता रहता है. हाँ इस सरकार में राइट ऑफ ज्यादा इसलिए हुए हैं क्योंकि राहुल गाँधी की ही कांग्रेस की सरकार ने अपने अमीर दोस्तों को 2008 से 2014 तक 34 लाख करोड़ का कर्जा सिर्फ एक फ़ोन कॉल पर दे दिया. इतनी बड़ी रकम को मैनेज करके बैलेंस शीट में दिखाने के लिए राइट-ऑफ तो करना ही पड़ेगा. यहाँ पढ़िए.

खुद पैसा कमाने की ललक और हमेशा सत्ता में रहने की भूख के चलते इस गाँधी परिवार ने देश को वहां कभी पहुँचने ही नहीं दिया जहाँ हम बहुत पहले पहुँच जाते. जापान और जर्मनी दुसरे विश्व युद्ध के चलते बर्बाद हो गए थे. आज सबसे समृद्ध देशों में गिने जाते हैं. हम भी तो तभी आज़ाद हुए थे न? हम वहां क्यों नहीं पहुँच पाए? कभी सोचा है? और अब, इस स्कीम के कारण ये देश पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा क्योंकि एक आदमी को प्रधानमंत्री बनना है. आज आप सबको ये सोचना है, कि क्या एक इंसान की प्रधानमंत्री बनने की सनक के चलते हम अपना देश बर्बाद होने देंगे?

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