Trending Discussions

Employment & Entrepreneurship

मोदी के 'गुड गवर्नेंस' फॉर्मूले को हरियाणा में लाये खट्टर, जानिये कैसे भ्रष्टाचार खत्म करते हुए युवाओं को दी रिकॉर्ड नौकरियां

by IRC-ADMIN - Jan 22 2019 1:02PM

युवाओं के लिए हमेशा से रोज़गार एक बड़ा मुद्दा रहा है। यह देश के अंदर किसी राजनैतिक पार्टी की जीत या हार का अंतर तय करने वाला मुद्दा है और स्पष्ट है कि यह एक बड़ा सवाल हर सत्ताधारी पार्टी से देश के युवा पूछते हैं कि रोज़गार कहाँ हैं? रोज़गार पर वैसे तो कोई स्थायी आँकड़ा नहीं है, और न ही कोई ऐसा तरीका जिससे यह पता लगाया जा सके कि देश के अंदर कितने रोज़गार मिले है। वैसे बहुत सारी एजेंसियां हैं जो लगातार ऐसे माहौल में रोज़गार पर सर्वे करती ही रहती हैं लेकिन उनका आँकड़ा कितना विश्वसनीय है, इसकी जिम्मेदारी कोई नहीं लेता है। वैसे विभिन्न प्रकार की एजेंसियों का आंकड़ा निकालने का तरीका भी अलग होता है। 

तो पता कैसे करें कि किसी राज्य में कितनी नौकरियां बनी हैं?

अब एक सामान्य व्यक्ति सरकारी आंकड़े का इंतज़ार करता है क्योंकि सरकार से बड़ी व्यवस्था शायद ही देश में दूसरी कोई हो, लेकिन एक समझदार व्यक्ति राज्य की परिस्थितियों को देखता है। जी हाँ! विभिन्न विभागों में निकल रही नौकरियों और उसमें जाने वाले लोगों को देख कर ही एक समझदार व्यक्ति अंदाज़ा लगाता है कि उस एक राज्य में नौकरियां बन रही हैं, या नहीं। हरियाणा में भी कुछ ऐसी ही परिस्थितियां हैं। हाल ही में हरियाणा की नौकरियों में इतिहास की सबसे बड़ी भर्ती का रिजल्ट आ चुका है। कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) ने चतुर्थ श्रेणी के 18218 पदों की लिखित परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए हैं जिनके आँकड़ें चौकाने वाले हैं। हरियाणा में पहली बार बगैर किसी साक्षात्कार के इतने बड़े स्तर पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई है। 

तो इतनी बड़ी भर्ती प्रक्रिया सफल कैसे हुई?

दरअसल पिछले दिनों सरकार द्वारा इंटरव्यू खत्म करने के निर्णय के बाद से यह भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। ऐसी परीक्षाओं में इंटरव्यू के दौरान भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आते थे। भाई-भतीजावाद का पारिवारिक ज़हर इतना घुला हुआ था कि पूरी प्रक्रिया 'सोर्स' के दम पर चलती थी। जिसका जितना बड़ा सोर्स, उसकी नौकरी उतनी ही पक्की। पिछली सरकारों ने उस पर कभी भी ध्यान दिया ही नहीं, उनको कभी ज़रूरत भी नहीं पड़ी। राज्य में मनोहर लाल खट्टर की सरकार बनने के बाद उन्होंने इस बड़े मकड़जाल को गहराई से समझा जिसके बाद यह पता चला कि असली दिक्कतें तो वहाँ है जहाँ आज तक कभी ध्यान ही नहीं दिया गया। इसके कारण हरियाणा का कौशल अवसरवादिता के दंश से पीड़ित था। इसके बाद ऐसी भर्तियों में साक्षात्कार (इंटरव्यू) की प्रक्रिया को हटा दिया गया। वैसे भी सीधी भर्तियों में इंटरव्यू का कोई औचित्य बनता भी नहीं था। इससे अब योग्य उम्मीदवार को ही नौकरी मिल रही है।

जानकारी के लिए आपको बता देंवें कि विभिन्न क्षेत्रों से चयनित उम्मीदवारों की संख्या क्या है:

भिवानी - 2,299
हिसार - 2,034 
जींद -1,659
महेंद्रगढ़ - 1,428
कैथल - 1037
सोनीपत - 1009
रेवाड़ी - 956
रोहतक - 953
झज्जर - 891
फतेहाबाद - 714
करनाल - 702
सिरसा - 673
पानीपत - 667
पलवल - 540
कुरुक्षेत्र - 523
यमुनानगर - 413
अम्बाला - 402
गुड़गांव - 375 
फरीदाबाद - 245 
मेवात - 154
पंचकूला - 111
अन्य वर्ग - 433 चयनित हुए हैं.

राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस अवसर पर कहा कि 'युवाओं को मेरिट पर रोजगार देना सरकार की प्रतिबद्धता रही है। इनेलो के छह साल में 5591, कांग्रेस के पहले 5 साल में 18020 युवाओं को सरकारी नौकरी मिली, जबकि भाजपा सरकार के दौरान यह आंकडा 54,197 तक पहुंच चुका है। भविष्य में भी हम पूरी पारदर्शिता से रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाएंगे।' एक तरफ जहां पूर्व की सरकारों में नौकरियों के अंदर भेदभाव के आरोप लगे थे, खट्टर सरकार में सभी जिलों को पूरा प्रतिनिधित्व मिला है। सोशल मीडिया साइट्स जैसे फेसबुक और व्हाट्सप्प पर दिनभर नौकरियों में पारदर्शिता और कर्मचारी चयन आयोग की स्वच्छ छवि लेकर खूब चर्चाएं भी चल रही है। यह बताता है कि प्रदेश के युवाओं के लिए किस स्तर पर कार्य किया जा रहा है।

IRC विश्लेषण:
हरियाणा सदैव से ही देश के विकास के पहियों में एक ऊर्जा भरने का कार्य करता आया है। हरियाणा में हुई यह बंपर भर्तियां सीधे प्रधानमंत्री मोदी और राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर काल खट्टर की दूरदृष्टि को दिखाती है। एक तरफ जहां देश में जाति के नाम पर विभिन्न पार्टियां लड़ाने का कार्य कर रही हैं, वहीं हरियाणा में हुई बंपर भर्तियों ने बाकी राज्यों का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित किया है। ऐसा नहीं है कि ग्रुप डी की नौकरियों में साक्षात्कार को हटाने का आईडिया पिछली सरकारों को नहीं आया होगा, मगर भ्रष्टाचार के दलदल में धंस चुके देश के अंदर उनको जनकल्याण के लिए सोचने का समय ही कहाँ मिला था। अब यह देखने वाली बात होगी कि देश भर में किस प्रकार से विपक्ष नए हथकंडे अपनाता है। आज के विपक्ष की नकारात्मकता और नेतृत्वहीनता को देख कर 'हथकंडा' शब्द ही सबसे पहले सूझता है। देश का विपक्ष सरकार की कमियों को निकाल उसको दुरुस्त करने के लिए नए तरीके और रास्ते सुझाने के लिए ही नहीं होता, अपितु अच्छे कार्यों पर सरकार की प्रषंसा करने के लिए भी होता है। परंतु देश के विपक्ष की स्थिति देख तो इनमें से दोनों ही चीजें नदारद दिखती हैं। कोई संदेह नहीं कि देशव्यापी महागठबंधन बनाने का प्रयास क्यों किया जा रहा है।

Source - https://goo.gl/KYyHsT

0 Comments