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मोदी की इस चाल से पाकिस्तान के परमाणु हथियार खतरे में, सऊदी से मिला बड़ा झटका

by IRC-ADMIN - Mar 13 2019 2:23PM

 

मात्र कुछ ही हफ्तों के भीतर दो बार सऊदी अरब के प्रतिनिधि भारत का दौरा करते हैं। भारतीय नेतृत्व से मिलते है। साथ ही साथ वो पाकिस्तान से भी लगातार संपर्क बनाए रखते हैं। इसी बीच बालाकोट में भारत की एयर स्ट्राइक होती है। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हर बढ़ते हुए घण्टे के साथ बढ़ता ही जाता है। अपने भाषण में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पष्ट रूप से कहते हैं कि 'बातचीत का समय अब निकल चुका है।'

यह सब वो घटनाएं हैं जो आपने टीवी पर देखी हैं। अपनी बुद्धि के अनुसार इसको समझने का प्रयास भी किया होगा, लेकिन जो आपको नहीं दिखा, हम आज वही दिखाने आये हैं। 

याद करिये जब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि 'पायलट प्रोजेक्ट खत्म हो चुका है। अब रियल करना है।' प्रधानमंत्री के इस कथन को खुफिया एजेंसियों में बहुत ही गंभीरता से लिया गया, दोनों ही देशो में खलबली मच गई। उधर अमेरिका भी खुद के वर्ल्ड लीडर वाली पदवी पर आंच आते हुए नहीं देख सकता था। उसने भी अपने घोड़े दौड़ाए, लेकिन इस बीच चुपके-चुपके पाकिस्तान में वो हो गया जिसकी भनक आम जनता में बहुत कम लग पाई। इसबार मोदी ने पाकिस्तान को इतना गहरा मारा है कि इमरान खान के मुंह से 'पीस जेस्चर' वाले तोते उड़ने लगे हैं।

■ पाकिस्तान के परमाणु-छाप ब्लैकमेलिंग को करारा जवाब -
भारत के नेतृत्व को लगातार अपने परमाणु हथियारों की धमकी देने वाला पाकिस्तान आज अपने परमाणु हथियारों की बात नहीं कर रहा है। पाकिस्तानी हुक्मरानों में से किसी ने भी अपने परमाणु हथियारों की धौंस नहीं दिखाई है। ऐसा चमत्कार रातों रात हुआ है। जी हाँ! भारत के नेतृत्व ने एक ऐसा तगड़ा झटका पाकिस्तान को दिया है, जो सीधे सऊदी से आया है। 

जब पाकिस्तान द्वारा जब अपने एयर स्पेस को बंद कर दिया गया था, उस समय पाकिस्तान से 3 कार्गो प्लेन रियाध की तरफ रवाना होते है, और उसके बाद वापस ही नहीं आते है। कहा जाता है कि इसमें सऊदी ने अपने बोइंग 777 का इस्तेमाल किया है। पाकिस्तान में 24 घण्टे के अंदर उड़ान भरने वाले यह अकेले जहांज है। यह संदेह के लिए बहुत तगड़े सबूत हैं। यही वो पायलट प्रोजेक्ट है जिसकी बात मोदी ने की थी। इस बार मोदी के नेतृत्व में पाकिस्तान के परमाणु विस्फोटकों पर ही हमला हुआ है, लेकिन हाथ सऊदी के हैं।

■ पाकिस्तान में उमड़ा 'डर' एक रियलिटी है -
पाकिस्तान के एयर स्पेस बंद होने के दौरान भी करीब 3 ऐसी फ्लाइट्स सऊदी की तरफ जाती हुई दिखीं जो पाकिस्तान के डर के माहौल के बारे में बता रही थी। दरअसल सूत्रों के हवाले से बड़ी ख़बर है कि सऊदी अरब ने अपने परमाणु हथियार वापस मांगे हैं। 

अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर सऊदी पाकिस्तान के हथियार कैसे मांग सकता है? तो इसके लिए आपको 2013 में चलना पड़ेगा जब सऊदी अरब ने पाकिस्तान के परमाणु हथियार में निवेश करने का एक बड़ा ऐलान किया था लेकिन उसमें एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्लॉज़ था जिसमें कहा गया था कि सऊदी कभी भी अपने हथियार वापस ले सकता है। बाकायदा इसके बारे में BBC ने खबर भी छापी थी।
अधिक जानकारी के लिए।

पाकिस्तान से करीब 3 कार्गो फ्लाइट्स सऊदी के लिए रवाना हुई जिनके फ्लाइट नंबर क्रमशः SV965, SV966 और SV9067 हैं। यह पाकिस्तान से उड़कर सऊदी तो पहुँचे लेकिन वहां पहुंचते ही उन्होने अपना ट्रांसपोंडर बंद कर दिया। बताया जा रहा है कि इन्हीं कार्गो फ्लाइट्स में सऊदी ने अपने हथियार वापस लिए हैं। अधिक जानकारी के लिए।

इससे साफ हो जाता है कि पाकिस्तान के परमाणु 'खिलौने' दरअसल उसकी वो खोखली धमकियां हैं, जिसको दे कर वो लगातार पूर्व में भारत के नेतृत्व को ब्लैकमेल करता आया है, लेकिन इस बार उसको मुँहतोड़ जवाब मिला है।

■ सऊदी की बढ़ी टेंशन -
बालाकोट हमले के बाद सऊदी अरब को यह डरलग रहा है कि भारत पाकिस्तान के परमाणु रिएक्टर्स पर लिमिटेड इंटेंसिटी का हमला कर सकता है। पठानकोट हमले के बाद भारत के नेतृत्व और जनता के बीच का गुस्सा देख कर सभी देशों में एक डर था कि कहीं भारत और पाकिस्तान आपस में परमाणु युद्ध न छेड़ दें। वैसे पाकिस्तान के आर्थिक हालात ठीक उसका उलट कह रहे थे। सऊदी अरब का एक बड़ा निवेश पाकिस्तान में लगा हुआ है। खुद सऊदी अरब भी यह मानता है कि ज़िम्मेदार राष्ट्र के मामले में भारत पाकिस्तान से बहुत आगे है। 

बालाकोट हमले के बाद सऊदी ने यह देखा कि भारत का हमला 1971 के बाद इस इंटेंसिटी का दूसरा हमला था। इतिहास के झरोखे में जाएंगे तो हमें पता चलेगा कि उस समय भी इसी प्रकार का हमला हुआ था और दुनिया को बंग्लादेश जैसा एक नया देश मिला था। मगर इस बार हमला बहुत गहराई में जा कर हुआ है। इस बार हमला 'पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर' में नहीं, बल्कि पाकिस्तान के बालाकोट में हुआ है। यानी सच में घर में घुसकर। इसकी इंटेंसिटी भी बहुत बड़ी थी। करीब 1000 किलो का बम गिराने के बाद वहां की स्थितिया देख पाकिस्तानी समझ चुके थे कि अब उसकी उल्टी गिनती शुरू है। पगलाया पाकिस्तान 2 दिन के अंदर ही भारत के मिलिट्री बेस पर हमला करता है, वह भी तब जब भारत ने उसके आतंकी ठिकानों पर हमला किया था, ना कि उसके मिलिट्री बेस पर। यह अपने आप में ही एक 'एक्ट ऑफ वॉर' थी। अपनी गलती धोने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अभिनंदन को वापस कर 'पीस जेस्चर' दिखाने का प्रयास किया था, लेकिन भारत के नेतृत्व द्वारा मन बनाया जा चुका था।

टाइम्स ऑफ इंडिया में पिछले दिनों एक लेख लिखा गया था जो पढ़ने योग्य है। इसमें बताया गया है कि कैसे मोदी ने बाजवा के दाँत खट्टे कर दिए हैं।

■ पाकिस्तान के परमाणु हथियार उसके नहीं -
पाकिस्तान के पास रखे हुए परमाणु हथियार पूर्णतया उसके नहीं, बल्कि तीन देशों का जॉइंट वेंचर है। इसमें चीन, सऊदी और अमेरिका का जॉइंट वेंचर है जिसमें हथियार पाकिस्तान की धरती पर रखे हुए हैं। इन हथियारों के 'ओनर्स'; 'स्टोरेज लोकेशन' और 'ट्रिगर ओनर्स' हैं। इस जॉइंट वेंचर में यह हथियार पाकिस्तान की धरती पर रखे हुए हैं। 

■ भारत के साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ?
सवाल यह भी उठता है कि अमेरिका और बाकी राष्ट्रों द्वारा यही काम भारत के साथ क्यों नहीं हुआ? इसका जवाब साफ है। भारत ने इस बार पाकिस्तान के धमकी को आड़े हाथों लिया है। भारत के पास वो सभी प्रकार के हथियार हैं जिससे एक परमाणु सम्पन्न देश को जवाब दिया जा सकता है।

अब सोच कर देखिये की भारत जैसे देश द्वारा कभी भी किसी भी देश पर अपने परमाणु हथियार के इस्तेमाल की बात नहीं की गई है। स्पष्ट शब्दों में कहें तो भारत के परमाणु हथियार रक्षात्मक कार्यों के लिए हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान के द्वार भारत को दी जाने वाली धमकियां सीधे बताती थी कि पाकिस्तान एक राष्ट्र के रूप में फेल है। वैसे भी, पाकिस्तान में परवेज़ मुशर्रफ तो अपने कई साक्षात्कारों में बोल चुके हैं कि पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियार सिर्फ भारत के लिए ही बनाये गए हैं। यह संयुक्त राष्ट्र को भी नज़र आ रहा था।

■ 1971 में ही लिख दी गयी थी कहानी -
बंग्लादेश के गठन के बाद विश्व बिरादरी में यह समझ लिया था कि पाकिस्तान का एक राष्ट्र के रूप में भविष्य सन्देह के घेरे में है। लेकिन उस समय विश्व की राजनैतिक परिस्थितियों को देखते हुए पाकिस्तान को वैसे ही फुसला कर रखा गया जैसे किसी बच्चे को रखा जाता है। पाकिस्तान का अमेरिकी कदमों के सजदा करना ऐसे ही नहीं था। आज यही काम वो चीन के साथ कर रहा है। 

■ मोदी ने ढूंढा पाकिस्तान का स्थायी इलाज -
यह सच है कि स्थितिया चाहें जो भी हो, लेकिन एक परमाणु सम्पन्न देश के साथ युद्ध एक बड़ा निर्णय होता है। भले ही पाकिस्तान हमसे जीत नहीं सकता है, लेकिन वो एक बड़ा घाव दे सकता है। अतः आवश्यकता यह है कि उसको उसी के खेल में हराया जाए। छद्म युद्ध की दहलीज पर भारत को ले जाने का प्रयास कर रहा पाकिस्तान इस समय खुद आर्थिक संकट से जूझ रहा है। बस उसी आर्थिक संकट को भारत ने और बढाया है। इसके साथ ही विश्व बिरादरी के सामने भारत लगातार यह दिखाने का प्रयास करता रहा है कि पाकिस्तान एक राष्ट्र के नाम पर फेल है। पठानकोट हमले के बाद से पाकिस्तान में जिस डर के माहौल को देखा जा रहा है, वो इसकी तसदीक करता दिखता है। पाकिस्तान की सड़कों पर ब्लैक आउट वाला अंधेरा उसके भविष्य का दर्शाता है।

■ IRC विश्लेषण -
यह एक संभावना है कि पाकिस्तान को जल्द ही भारत द्वारा एक बड़ा ज़ोरदार जवाब मिल सकता है। आने वाले दिनों में हम यह देखेंगे कि मोदी सरकार द्वारा कुछ ऐसा कर दिया गया है, जो इतिहास के पन्नों में लिखा जाएगा। जो लोग बालाकोट को अंत समझ रहे हैं, वो गलत हैं। भारत बालाकोट को अंत नहीं, बल्कि शुरुआत की तरह देख रहा है। आज के युग में आवश्यक नहीं है कि दुश्मन की ज़मीन पर सैन्य कार्यवाही कर ही उसकी कमर तोड़ी जाए। डिप्लोमेटिक तरीके से जिस रास्ते को ढूंढना पिछली सरकारों के लिए मुश्किल हो रहा था, मोदी ने वो आसान कर दिखाया है। एकबार 2014 में मोदी का इंडिया टीवी के शो आपकी अदालत में कही वह बात याद करियेगा जब उन्होने कहा था कि ' सवा सौर करोड़ आबादी वाले देश में दुनिया पर दबाव बनाने की ताकत है।' 

आज मोदी ने यही कर दिखाया है!!!

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