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Politics - Elections 2019

अगर 23 मई को भाजपा को 300 सीटें मिलती हैं तो चौकिएगा मत, जानिये पांच चरणों के मतदान का आंकलन

by Ankit Jain - May 7 2019 10:11PM

पांच चरण के मतदान के आधार पर, 2019 का मतदान प्रतिशत, 2014 की तुलना में करीब 1 प्रतिशत ज्यादा रहने की संभावना है। और ये तब, जब 2014 में भी लोक सभा के इतिहास में सबसे ज्यादा मतदान हुवा था (66.4%), जो कि 2009 के मुकाबले 8% ज्यादा था।

दिलचस्प बात ये भी है कि 2019 में महिलाएं बढ़ चढ़ के मतदान कर रही हैं। अब तक के आंकड़ों के अनुसार, करीब 29.10 करोड़ महिलाऐं इस बार वोट डालेगी, ऐसी संभावना है, जो कि 2014 से करीब 3.0 करोड़ ज्यादा है। और करीब 31.50 करोड़ पुरुष वोट डालेंगे जो कि 2014 से करीब 2.1 करोड़ ज्यादा है। इसका मतलब ये है कि मतदान में 1% बढ़त मुख्य रूप से महिलाओं की वजह से हो रही है, पुरुषों का मतदान प्रतिशत 2014 की तुलना में थोड़ा ही बढ़ रहा है।

महिलाओं और पुरुषों के मतदान प्रतिशत में 2014 से पहले काफी अंतर हुवा करता था जो कि 2014 मैं सिर्फ 1.5% रह गया (2009 - 4.4%)। पहली दो फेज के आंकड़ों के अनुसार, 2019 में महिलाओं का मत प्रतिशत करीब 1.5-2.0% बढ़ता नज़र आ रहा है और इसलिए महिलाओं व पुरुषों के मत प्रतिशत का अंतर इस बार ना के बराबर रहने की संभावना है।

उज्वला, मुद्रा, जन-धन, आवास, ट्रिपल तलाक कानून और मोदी की लोकप्रियता की वजह से ये अनुमान गलत नही होगा कि महिलाएँ ज्यादा बीजेपी को वोट करेगी। महिलाओं के लिए बढ़ चढ़ कर निकल के, विपक्ष के लिए वोट करने का कोई कारण दिखता नही है।

एक और महत्वपूर्ण बात ये है कि लगभग सभी हिंदी भाषी या परंपरागत रूप से बीजेपी की मज़बूत पकड़ वाले बड़े राज्यों में 2014 के मुकाबले मतदान अधिक हुवा है।

बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना और तमिलनाडु में मतदान प्रतिशत गिरा है। बंगाल व ओडिशा में - 1) वहां की लोकल पार्टियों के प्रति उदासीनता भी एक कारण हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि बंगाल व ओडिशा PM मोदी के नाम पर बढ़ चढ़ कर पहली बार ही वोट कर रहे हैं (2014 में यहां उतना वोट नही मिला), इसलिए वहां के बीजेपी के वोटर तो उत्साहित ही होंगे और, 2) केंद्रीय बल व बीजेपी का कैडर 2014 की तुलना में मज़बूत होने की वजह से, फ़र्ज़ी वोट भी कम पड़ा होगा।

एक और दिलचस्प बात ये है कि उत्तर प्रदेश में मतदान बढ़ा है (जितने भी उपचुनाव बीजेपी हारी थी उस समय मतदान प्रतिशत 2014 से बोहोत कम था)। उदाहरण के लिए, कैराना सीट पर 2018 के उपचुनाव के समय करीब 9.38 लाख वोट पड़े थे, लेकिन इस चुनाव में 11.21 लाख वोट डाले गए हैं। ये मानना गलत नही होगा कि जो ज्यादा मतदान यहां हुवा है, वो ज्यादातर बीजेपी का वोट होगा क्योंकि गठबंधन (सपा + बसपा + RLD) का गणित तो 2018 में उपचुनाव में काम कर ही रहा था। कम वोट जो पड़े वो ज्यादातर बीजेपी के वोटर्स थे जिनको उपचुनाव की वजह से इतने उत्साहित नही थे। गठबंधन की गणित और करीब 2 लाख (2019 की तुलना में) कम मतदान के बावजूद बीजेपी यहां से करीब 45000 वोट से हारी थी। ये आंकड़े गठबंधन की बाकी सीटों पे फैल होती हुई गणित का संकेत भी दे रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि तथाकथित जातिगत गणित गठबंधन के पक्ष में होने के बावजूद अगर बीजेपी कैराना जीतती हुई दिख रही है तो ये गठबंधन के लिए काफी बुरा संकेत है। ये इस बात को भी प्रमाणित करता है कि इस बार जाति के आधार पर वोट नही पड़ रहा।

उत्तर प्रदेश में अगर विधान सभा के हिसाब से भी आंकलन करें तो जिन विधान सभाओं में महागठबंधन के परंपरागत वोटर ज्यादा है, वहां ज्यादातर जगह मतदान कम और जहाँ बीजेपी के परंपरागत वोटर ज्यादा है वहाँ ज्यादातर जगह मतदान अधिक हुवा है (इस पर एक बड़े चेनल ने चौथे चरण के बाद एक डिटेल्ड प्रोग्राम भी किया था)।

पांचवें चरण के मतदान ने मध्य प्रदेश के बारे में फैल रही अफवाहों को भी दरकिनार कर दिया है। चौथे चरण के बाद विपक्षी ऐसा फैला रहे थे कि मतदान भारी मात्रा में बढ़ने का कारण एक वर्ग है जो बीजेपी के खिलाफ वोट कर रहा है। लेकिन पांचवे चरण की सीटों पर मध्य प्रदेश में मतदान और ज्यादा बढ़ा है जबकि उन सीटों पर उस वर्ग के मतदाता इतने है ही नही। इसका मतलब ये है कि वो वर्ग बीजेपी के विरुद्ध वोट नही कर रहा है। बल्कि पूरा मध्य प्रदेश बढ़चढ़ के वोट कर रहा है और ये नरेंद्र मोदी के पक्ष में ही हो सकता है। ऐसा इसलिए कि जो भी लोन माफी के वादों से वोट मिलने थे वो विधान सभा में मिल गए और उसके बावजूद कांग्रेस को बीजेपी से 1% मत कम मिला था। अब क्योंकि लोन माफी 20-30% भी नही हुई इसलिए स्वाभाविक है कि नाराज़ वोटर ज्यादा होंगे। दूसरा सरकार के शुरुवाती दौर में ही भ्रस्टाचार, बिजली की समस्या इत्यादि से बीजेपी का वोट शेयर बढ़ना चाहिए। इसमें कोई संशय नही लगता कि मध्य प्रदेश बढ़चढ़ कर मोदी के पक्ष में वोट कर रहा है।

केरल में मतदान करीब 4% बढ़ा है, ये सीधे तौर पर सबरीमाला का असर हो सकता है (क्योंकि दूसरा कोई बड़ा नया मुद्दा था नही चुनाव में जिसकी वजह से वोटर बढ़चढ़ के वोट करें)। ये बीजेपी के लिए अच्छा संकेत है।

सके अलावा जिन राज्यों में युवा वोटर्स और सीनियर नागरिकों की संख्या औसत से ज्यादा है, वहाँ अधिक मतदान हुवा है।

उपरोक्त सभी कारणों की वजह से, 23 मई को ऐतिहासिक परिणाम आने की पूरी संभावना है। बीजेपी को इस बार करीब 23-24 करोड़ वोट (38-40% वोट शेयर) एवं 300 या उससे अधिक सीट मिलने के पूरे आसार है। ये भारत का एक नया इतिहास ही बनेगा क्योंकि पहले जब कांग्रेस की 300 से ऊपर सीट आती थी तब सामने कोई बड़ा विपक्ष था ही नही।

 

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