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क्या सही में मोदी सरकार की स्कॉलरशिप स्कीम ने हिन्दुओं को नज़रअंदाज़ किया है?

by IRC-ADMIN - Jun 14 2019 10:40AM

एक देश के अंदर किसी सरकार का विश्वास तभी बनता है जब उसके बहुसंख्यक उसपर विश्वास करें। भारत में विश्वास को कई मायनों में अहम माना जाता है। इसी विश्वास के टूटने का कारण था कि कभी 400 से ज़्यादा सीटो पर जीतकर आने वाली कांग्रेस इस समय विपक्ष का नेता बैठाने की हैसियत में नहीं है। नरेंद्र मोदी ने बहुसंख्यकों के लिए क्या किया है और क्या नहीं, इसका जवाब तो 303 सीटों का बड़ा आँकड़ा देता है। फिर भी कहीं न कही मन में यह संदेह भर दिया जाता है कि आखिर नरेंद्र मोदी ने हिंदुओं के लिए किया क्या है।

वर्ष 2018-19 में श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय ने 74.8 प्रतिशत स्कॉलरशिप हिंदुओं को दी थी। इसका आँकड़ा निकाला जाए तो पता चलेगा कि करीब 35 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप अकेले हिन्दुओ को ही दी गयी थी। यहां मुस्लिमों के हाथ इसका 24.7 प्रतिशत स्कॉलरशिप ही लगा था। फिर भी मुसलमानों को स्कॉलरशिप देने के मोदी के फैलसे को तुष्टिकरण बताने का प्रयास खत्म ही नहीं हो रहा है।

आइए ज़रा एकबार फिर से नज़र डालते हैं कि मोदी जी ने हिंदुओं के लिए किया ही क्या है। 

◆ साल 2018-19 में हिंदुओं में उच्चतर शिक्षा विभाग से 90.8 प्रतिशत स्कॉलरशिप प्राप्त की थी। यानी 74.43 करोड़ रुपये हिंदुओं के ऊपर ही खर्चा किया गया था। इसमें भी मुसलमानों के हाथ 5.5 प्रतिशत ही लगा था। 


◆ साल 2017-18 में सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय से मिलने वाले स्कॉलरशिप का 92 प्रतिशत हिंदुओं को प्राप्त हुआ है। इसका एकदम सटीक आँकड़ा 92.7 प्रतिशत बैठता है। बाकी का 7.3 प्रतिशत बौद्धो को मिला है। इसी साल में संवितरित 8 करोड़ स्कॉलरशिप में से 7 करोड़ हिंदुओं को प्राप्त हुई है। वहीं जैन 1 प्रतिशत; सिख 1.1 प्रतिशत; ईसाइयों को 3.4 प्रतिशत; मुस्लिम 3.2 प्रतिशत लेकर बैठे हुए हैं। 



◆ रेलवे बोर्ड की तरफ से भी मिलेने वाली स्कॉलरशिप को एकबार देख लेते हैं। रेलवे बोर्ड की तरफ से दी जाने वाली स्कॉलरशिप का 91 प्रतिशत 2018-19 में हिंदुओं को ही मिला था। इसमें मुसलमानों के हाथ 6.3 प्रतिशत और ईसाइयों के हाथ 1.7 प्रतिशत आया था। 

 ◆ वर्ष 2018 -2019  में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 74.8% स्कॉलरशिप हिन्दुओं को दी। जिसमे 35 करोड़ की स्कॉलरशिप केवल हिन्दुओं को ही वितरित की गयी।


  ◆ वर्ष 2018 -2019  में गृह मंत्रालय की और से दी जाने वाली 92% स्कॉलरशिप हिन्दुओं को दी गयी। उसी साल मंत्रालय ने स्कॉलरशिप मद में जो 8 करोड़ रुपये जारी किये उनमे से 7 करोड़ रुपये हिन्दुओं को वितरित किये गए।


अब इसका पूरा हिसाब जोड़ेंगे तो पूरा गणित सैकड़ों करोड़ रुपयों तक आएगा। इतना करने के बाद भी हमारे देश के अंदर यह सवाल हमेशा उठता है कि आखिर मोदी ने हिंदुओं के लिए किया ही क्या है। यही बात समझ से परे है। एक प्रकार से देखा जाए तो हमारे यहां यह "किया ही क्या है" वाला भूत हर 6 महीने में एकबार खड़ा हो जाता है। एक सच्चाई को समाज को।स्वीकार करना पड़ेगा कि देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मुसलमानों का भी है। तीन तलाक विधेयक यदि सरकार लाती है तो इसके साथ ही उनकी शिक्षा का भी इंतजाम करना सरकार का कर्तव्य है। नहीं तो जो कश्मीर में हुआ है और हो रहा है, उसी प्रकार की भावना अन्य भागों में बढ़ाने के लिए हर एक बड़ा कारण बन जायेगा।

हिंदुओं के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने हर वह सम्भव प्रयास किया है जिससे शिक्षा के क्षेत्र में हिंदुओं को बेहतर स्थान प्राप्त हो। उज्ज्वला जैसी योजनाओं से गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर करने के साथ ही मध्यम वर्ग के उन हिंदुओं को भी शिक्षा के स्तर में बेहतर स्थान दिलाने के लिए इस सरकार ने काम किया है।

■ क्यों उठता है यह सवाल?

देश के अंदर यह सवाल बार बार इसीलिए उठता है क्योंकि कहीं न कहीं हमारे अंदर एक असुरक्षा की भावना है। यह असुरक्षा की भावना समझी भी जा सकती है क्योंकि देश के कुछ इलाकों और खासकर कश्मीरी पंडितों के साथ जो हुआ उसको देखकर ऐसी ही भावना आती है। फिर भी हमें अपनी सरकार पर भरोसा होना चाहिए। वो सरकार जिसको हमने इतनी उम्मीदों के साथ चुना है। ऐसी भावना के उत्पन्न होने पीछे एक कारण यह भी है कि देश में नकारात्मकता फैलाने वाली शक्तियां इस समय अपना पूरा जोर लगाए हुए हैं। इसी नकारात्मकता के चलते उन्होंने चुनाव भी लड़ा लेकिन हमारी और आपकी एकता ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। खैर, इस समय बेमेल गठबंधन टूट रहे हैं। लेकिन उनके स्वार्थ के गठबंधन अभी भी नहीं टूट रहा है।

■ मुस्लिम समाज के रिवाइवल का समय : 

इस देश में पूर्व की सरकारों की तरफ से हिंदुओं के धर्म के भीतर कई प्रकार के बदलाव करने के प्रयास हुए थे। लेकिन इस्लाम को इसलिए नहीं छुआ गया क्योंकि यह उनका वोटबैंक था। कुरीतियां हर धर्म में होती हैं। आप यह कहकर किसी धर्म को अभयदान नहीं दे सकते हैं कि वह आपका वोटबैंक है। तीन तलाक जैसे कानून उनकी उन्हीं कुरीतियों को खत्म करने का प्रयास है। देश के अंदर संविधान को ही सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।

■ IRC विश्लेषण :

इस देश के बहुसंख्यकों का विश्वास हिलाना ज़्यादा कठिन नहीं है। इस देश के बहुसंख्यकों को भी यह पता है। लेकिन इतने सालों से जैसे उनके ऊपर अत्याचार हुआ और उनकी मान्यताओ पर वैचारिक आघात हुए हैं, उसके बाद से जगा हुआ हिन्दू इस समय फिर से संदेह वाले वामपंथी "एनेस्थीसिया" देने के प्रयास है। यह सरकार आपकी है और जब कोई आपके अधिकारों को नहीं उठाता था तब सिर्फ यही लोग थे जिन्होंने आपके लिए लड़ाई लड़ी है। बंगाल इस समय एक बड़ा उदहारण है। ऐसी स्थिति में संदेह भविष्य के भारत के लिए बेहतर नहीं।

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