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रेलवे देने जा रही है 2.3 लाख नई नौकरियां, साथ में होगा सामान्य वर्ग के लिए 10% आरक्षण भी लागू, जानिये क्या है इसमें आपके लिए

by IRC-ADMIN - Jan 24 2019 5:44PM

जब सदन में रात 10 बजे आर्थिक रूप से कमज़ोर तबकों को 10% आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन बिल राज्य सभा से पास हुआ तो मीडिया चैंनलों के कैमरे विपक्ष के नेताओं की तरफ मुड़ गए। इनमें से कुछ नेताओं के बयान पर ज़रा गौर करियेगा:

कपिल सिब्बल (कांग्रेस) - "ये बिल तो पास करवा लिया लेकिन नौकरियां कहाँ हैं?

रामगोपाल यादव (समाजवादी पार्टी) - "नौकरियां तो दीजिये, नहीं तो आरक्षण से क्या होगा?"

कम्युनिस्ट पार्टी - ''देश बर्बाद हो रहा है, नौकरिया हैं नहीं तो आरक्षण दे कर क्या किया?''

इन सभी बयानों में यह साफ झलकता है कि सबकी चिंता नौकरियों को ले कर थी। उनका कहना था कि देश में नौकरिया ही नहीं हैं तो देश में सवर्णों को आरक्षण दे कर क्या कर लेंगे?

दिखाने का प्रयास हुआ कि देश के इन नेताओं और पार्टियों को देश के युवाओं की नौकरियों की बहुत चिंता है। लेकिन अब मोदी जी ने इनकी चिंता दूर कर दी है।


जी हाँ! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे ने 2 लाख 30 हज़ार नई नौकरियां निकाली हैं। इनमें सबसे ज़्यादा ध्यान देने वाली बात ये रही कि आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग को 10% आरक्षण का लाभ बिल पास होने के एक महीने के भीतर ही मिलना शुरू हो गया है। रेलवे ने इन नौकरियों में 10% आरक्षण आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग को देना शुरू कर दिया है। इन नौकरियों में SC/ST और OBC के अलावा आर्थिक रूप से कमज़ोर तबकों का भी ख्याल रखा गया है। इन चारों वर्गों के लिए निकली नौकरियों की संख्या इस प्रकार है: SC - 34 हज़ार ST - 17 हज़ार OBC - 62 हज़ार आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS) - 23 हज़ार

■ कब मिलेंगी नौकरियां? दरअसल यह पूरी रिक्रूटमेंट ड्राइव दो अलग फेस में चलाई जाएगी। इसका पहला फेस फरवरी-मार्च 2019 से लेकर अप्रैल-मई 2020 तक चलाया जाएगा। इसके बाद दूसरा फेस मई-जून 2020 से लेकर जुलाई-अगस्त 2021 तक चलाया जाएगा। इन नौकरियों में पूरी पारदर्शिता के लिए कंप्यूटर आधारित टेस्ट्स (CBT) कराए जाएंगे। यह इसलिए ताकि इन नौकरियों में पुराने समय में होने वाली धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार को कम कर इसमें पारदर्शिता लायी जा सके। यह अपने आप में एक सराहनीय कार्य है।


 

■ रेलमंत्री पीयूष गोयल ने दी जानकारी: इस खबर की पुष्टि खुद रेल मंत्री पीयूष गोयल ने एक ट्वीट के माध्यम से की है। उन्होंने कहा कि देश में यह रिक्रूटमेंट ड्राइव दो साल तक चलाया जाएगा जिसमें 2 लाख 30 हज़ार नौकरिया युवाओं को दी जाएगी। इसमें 10% आर्थिक रूप से कमज़ोर तबकों को भी आरक्षण मिलने वाला है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीयूष गोयल जी ने बताया कि 2 लाख 25 हज़ार से लेकर 2 लाख 50 हज़ार लोगों को और अधिक मौके मिलेंगे। 1.50 लाख लोगों की भर्ती का काम चल रहा है। एक प्रकार से 4 लाख नई नौकरियां रेलवेज अकेले देने जा रहा है, जिसमें 1 लाख 50 हज़ार की प्रोसेस बहुत आगे बढ़ चुकी है। करीब 2 से 2.5 महीने में प्रोसेस खत्म हो जाएगा। पिछले साल, रेल मंत्रालय ने ग्रुप सी और ग्रुप डी समूह में 1.2 लाख से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन दिया था जिसमें 2.5 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों ने इस पद के लिए आवेदन किया था। दोनों श्रेणियों के लिए भर्ती प्रक्रिया अगस्त 2019 तक पूरी हो जाएगी।

 

■ क्यों हैं यह नौकरियां बेहद खास?

इन नौकरियों के पीछे सीधा सा तर्क युवाओं को बेहतर अवसर प्रदान करना है। बढ़ती हुई जनसंख्या में अवसरों की सीमित अवस्था केंद्र सरकार के लिए भी एक सिरदर्द थी। अब समय के साथ इन अवसरों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया, क्योंकि संसाधन तो सीमित ही रहेंगे जो एक सत्य है।




देश के अंदर आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग को पहली बार किसी सरकार द्वारा सहायता मिली है। जातिगत वोटबैंक के चलते इन अर्थिल रूप से कमज़ोर वर्गों को आरक्षण तो छोड़िए, बेहतर सुविधाएं तक नहीं मिलती थी। ऊपर से देश के अंदर जिस प्रकार से जनसँख्या के साथ प्रतिस्पर्धा भी बढ़ती जा रही है, इस वर्ग को और बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब इस आरक्षण के बाद इनको सहायता मिली है।



■ IRC विश्लेषण:
देश के युवाओं के लिए नौकरिया हमेशा से ही एक बड़ा मुद्दा रही हैं। रेलवे एक विश्वसनीय क्षेत्र है जिसमें हमेशा से ही सबसे ज़्यादा नौकरिया निकलती रहती हैं। परंतु इस बार रेलवे में हो रही बड़ी तैयारियां और ट्रैक्स को बढ़ाने का कार्य जारी है। ज़्यादा कार्य सीधे तौर पर ज़्यादा कर्मचारियों की माँग करता है। ठीक यही हुआ भी है, जिसका एक उदाहरण ये बम्पर नौकरियों की भरमार है। रेलवे मंत्रालय में लगातार रेलवे के विकास के लिए कार्य किया जा रहा है। इन्हीं कार्यों की बदौलत आज रेलवे की कायापलट करने का स्वप्न ले कर पीयूष गोयल मैदान में खड़े हैं। नकारात्मक राजनीति करने वालों को इसमें भी कमियाँ नज़र आएंगी। वैसे लोकतंत्र है तो सबको बात रखने का अधिकार है, लेकिन मात्र विरोध के लिए विरोध वाली राजनीति सदैव देश के लिए घातक रही है। आशा है कि देश का विपक्ष यह समझेगा। वहीं पीयूष गोयल जी के नेतृत्व में रेल मंत्रालय बहुत बेहतर स्थिति में नज़र आ रहा है।

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