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वो वादे जो कांग्रेस ने अपने पुराने घोषणापत्रों में किये, परन्तु पूरे मोदी ने किये

by - Apr 3 2019 12:00PM

आज कांग्रेस ने अपना चुनावी मेनिफेस्टो जनता के सामने रखा। इस मैनिफेस्टो को देखकर 2004 और 2009 के उसके उस मेनिफेस्टो की याद आ गई जिसमें उसने वादे तो बहुत बड़े किए थे लेकिन जमीन पर कार्य कुछ भी नहीं किया था। 'चौकीदार चोर है' जैसी अपमानजनक शब्दावली का प्रयोग करते हुए वह चुनावी मैदान में चुनाव जीतने के लिए उतरी है। इसी बीच में उसने जनता को लालच देने का भी एक चुनावी तड़का लगा दिया है। आज हम आपको उसके इसी चुनावी लॉलीपॉप के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं। इस पूरे आर्टिकल को बहुत ध्यान से पढ़िएगा और इसको अधिक से अधिक शेयर करिएगा। झूठ और फरेब के दम पर कांग्रेस ने आज तक सत्ता का स्वाद चखा है। वह इस बार सफल नहीं होने देना है।

इस पूरे आर्टिकल में हम आपको उन सभी वादों के बारे में बताएंगे जो किए तो कांग्रेस ने थे, लेकिन उसको पूरा भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार ने किए हैं। इसी आर्टिकल में हम आपको यह भी बताएंगे कि किस प्रकार से देश के अंदर प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने निचले तबके से लेकर ऊपरी तबके तक के लोगों को लाभान्वित करने का एक भगीरथ प्रयास किया है।

 तो आइए , आगे शुरू करते हैं...

■ सभी गाँवों को बिजली का झूठा वादा:

कांग्रेस पार्टी के मेनिफेस्टो में जो एक बात हमेशा से कही गयी है वह सभी गांवों को बिजली पहुंचाने की बात रही है। आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं कि देश की सबसे पुरानी पार्टी ने वर्ष 2004 और वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों में एक ही वादा दो बार अपने मेनिफेस्टो में किया लेकिन दोनों बार उसे पूरा करने में विफल रही। कांग्रेस ने क्रमशः 2004 और 2009 के अपने चुनावी मेनिफेस्टो में सभी गांव को बिजली से रोशन कर देने का वादा किया था लेकिन 2014 में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार बनने के बाद भी अट्ठारह हजार से ज्यादा ऐसे गांव थे जहां पर बिजली पहुंची ही नहीं थी। 70 वर्षों के राज में उसका यह रिपोर्ट कार्ड था।

जब प्रधानमंत्री मोदी की सरकार 2014 में बनी तब अट्ठारह हजार से भी ज्यादा गांव सरकार ने चिन्हित किए जहां पर बिजली नहीं पहुंची थी। इनमें से अधिकतर गांवों में बिजली का खंबा भी नहीं पहुंचा था। यह प्रधानमंत्री मोदी की दूर दृष्टि और कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि आज देश के अंदर ऐसा कोई गांव नहीं है जहां पर बिजली ना पहुंची हो। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी हर घर तक बिजली पहुंचाने के लिए सटीक फ्रेमवर्क के साथ तैयार हैं।

2004 और 2009 के मेनिफेस्टो में कांग्रेस का झूठ स्पष्ट रूप से सामने आ जाता है। वह एक ही सपने को 10 साल तक बेचती रही है लेकिन उसके बावजूद भी उसने कभी उस सपने को पूरा नहीं किया क्योंकि उसे यह पता था कि यदि गरीबों के सपने पूरे हो गए तो फिर कांग्रेस पार्टी को वोट कौन देगा?

■ सभी गांवों में ब्रॉडबैंड का झूठा वादा : 

वर्ष 2004 के मेनिफेस्टो में कांग्रेस पार्टी ने सभी गांवों में ब्रॉडबैंड की सुविधा मुहैया कराने का एक वादा किया था। आपको यह जानकर और भी अधिक आश्चर्य होगा कि यही वादा उसने 2009 के चुनावी मेनिफेस्टो में भी किया था। इन्हीं दोनों वादों के बाद कांग्रेस ने सबसे बड़ी पार्टी होने का लक्ष्य हासिल किया था। दोनों बार अपने प्रधानमंत्री को केंद्र में बैठाने के पश्चात भी उसने यह वादे पूरे नहीं किए। इसके सबूत आपको सरकारी आंकड़ों में मिल जाएंगे जहां आपको यह पता चलेगा कि 2004 से लेकर 2014 के एक दशक के लंबे अंतराल के मध्य भी कांग्रेस मात्र 59 ऐसे गांव थे, जहां ब्रॉडबैंड की सुविधा मुहैया करा पाई थी।

जनता ने अंततः 2014 में यह पता कर लिया कि कांग्रेस पार्टी ने उसको 10 साल तक मूर्ख बनाया है। 2014 के अंदर उसको सत्ता से बाहर करने के बाद उसने प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता के मध्य बैठाया। एक प्रधान सेवक के रूप में जब प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी आंकड़े मंगाए तो उन्हें इन 59 गांव का पता चला। वह जानकर काफी आश्चर्यचकित थे कि 10 साल के अंदर सिर्फ 59 ऐसे गांव थे जहां पर ब्रॉडबैंड की सुविधा मुहैया कराई गई थी। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इस ओर भी कार्य करना शुरू किया और आज करीब 1,17,000 ऐसे ग्राम पंचायत है जिनको ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ दिया गया है। जिस भी सर्विस प्रोवाइडर के नेटवर्क को चलाते हुए आप ऑनलाइन वीडियो देखते हैं, वह किसी और की नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की ही देन है जो उस गांव के अंदर ऑप्टिकल फाइबर पहुंचने से प्राप्त हुई।

जब नियत साफ और संकल्प अटल हो तो ऐसे कार्य किए जा सकते हैं।

■ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का झूठा वादा : 

साल 2009 के अपने मेनिफेस्टो के अंदर कांग्रेस ने यह वादा किया था कि वह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम को अपने यहां लागू करेगी। भगवान जाने कि उसने ऐसा क्या सोचकर वादा कर दिया क्योंकि जब प्रधानमंत्री मोदी सत्ता में आए तब हमारे देश के ज्यादातर लोगों के पास तो बैंक अकाउंट भी नहीं था। खैर कांग्रेस का यह वादा भी कोरा झूठ साबित हुआ। कांग्रेस का यह वादा सिर्फ कोरा झूठ साबित नहीं हुआ बल्कि एक बहुत बड़ा घोटाला साबित हुआ जो कि कभी सामने नहीं आ पाया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक आंकड़े के द्वारा यह बताने का पूरा प्रयास किया कि इस योजना के अंतर्गत कांग्रेस ने 90,000 करोड़ से ऊपर का घोटाला किया है।

प्रधानमंत्री मोदी की सरकार बनने के बाद करीब 439 ऐसी योजनाएं हैं जिसमें डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम को लागू किया गया है। इन सभी योजनाओं से करीब 64,67,85,30,00,000 रूपये लाभार्थियों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किए जा चुके हैं। तो यह 90,000 करोड रुपए का कांग्रेसी राज का घोटाला कैसे हुआ? दरअसल इस दौरान 8 करोड़ ऐसे फर्जी अकाउंट पाए जिनका कागजों में तो अस्तित्व था लेकिन असल जिंदगी में कोई अस्तित्व नहीं था। जाहिर सी बात है कि इन आठ करोड़ बैंक अकाउंट के द्वारा नब्बे हजार करोड रुपए का घोटाला कांग्रेस ने सीधे-सीधे किया है।

■ OROP का झूठा वादा :

2009 के अपने चुनावी मेनिफेस्टो के अंदर कांग्रेस पार्टी ने वन रैंक वन पेंशन का वादा किया था। हालांकि यह वादा उसके मेनिफेस्टो के अंदर बहुत पीछे था लेकिन फिर भी उसने उन फौजियों को लुभाने का प्रयास किया जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। कांग्रेस का यह वादा सिर्फ एक कोरा वादा बनके इसलिए रह गया क्योंकि इस वन रैंक वन पेंशन को देने के लिए उसने ना तो कोई फ्रेमवर्क बनाया था और ना ही कोई ऐसा सबूत कांग्रेस के पास था जिसके इस्तेमाल से वह इसको बता सके कि कितने ज्यादा सैनिकों को कितना पैसा इसमें मिलेगा। 2014 के समय जब कांग्रेस का राज खत्म होने को आया तो अफरातफरी ने कांग्रेस को पूरी तरीके से घेर लिया और सदन के अंदर इस एक स्कीम के लिए मात्र 15000 करोड रुपए अलॉट किए गए। यह वन रैंक वन पेंशन के लिए किसी चिल्लर से कम नहीं था। इतना पैसा तो सिर्फ इस स्कीम को इंप्लीमेंट करने में ही लग जाता है।

अपनी सरकार बनने के बाद प्रधान सेवक मोदी ने इस एक योजना को ना सिर्फ लागू किया बल्कि एक मजबूत फ्रेमवर्क के साथ ही बजट में भी पर्याप्त पैसे एलोकेट किए। इस वन रैंक वन पेंशन की 3 किस्ते भी सरकार की तरफ से सेवानिवृत्त सैनिकों को दी जा चुकी हैं। फिर भी कांग्रेस का इकोसिस्टम यह सिद्ध करने में लगा हुआ है कि देश के अंदर प्रधानमंत्री मोदी ने वन रैंक वन पेंशन का वादा पूरा ही नहीं किया। वह यह बताने का भी प्रयास करता हुआ दिखाई दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के राज में इसको आधा ही पूरा किया गया है।

■ GST का वादा, जो कभी नहीं हुआ पूरा :

आज जिस गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स को राहुल गांधी गब्बर सिंह टैक्स कहते हैं, यही गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स कांग्रेस के राज में लाया गया था। उस टैक्स के अंदर इतनी खामियां थी कि यह कभी सदन से उस टैक्स को पास ही ना करा पाए। वह ना ही अपने गठबंधन को इस टैक्स को पास कराने के लिए मना पाए और ना ही विपक्ष को। इनकी जिद थी कि जिस प्रकार के रूल इन्होंने जीएसटी के अंदर बनाए हैं उसको उसी प्रकार से लागू किया जाए। यह इनकी अनैतिक ज़िद थी। यह किसी दूसरे पक्ष को नहीं सुनते। जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में भी यह सभी राज्यों को इस जीएसटी को पास कराने के लिए मना नहीं पाए। अंततः यह हुआ कि 2014 के के अंदर कांग्रेस जीएसटी पास नहीं करा पाई।

प्रधानमंत्री मोदी की सरकार बनने के बाद उन्होंने इस गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स को प्राथमिकता देते हुए इसकी जटिलताओं को कम किया और इसके साथ ही जीएसटी काउंसिल की बैठक के अंदर सभी राज्यों को यह मनाने में सफल भी हुए कि वह इस जीएसटी टैक्स को अपने राज्य में इंप्लीमेंट करें। आज भले ही राहुल गांधी इस एक कर को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स की जगह गब्बर सिंह टैक्स कह रहे है, लेकिन वह इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ सकते हैं कि उस जीएसटी काउंसिल की बैठक में खुद कांग्रेस शासित राज्य भी थे। जिन्होंने इस गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स के लिए हामी भरी है। यह कांग्रेस का एक कोरा झूठ है जो किसी भी पढ़े लिखे व्यक्ति द्वारा साफ पकड़ लिया जाएगा।

■ आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को आरक्षण :

समाज के विभिन्न वर्गों को बांटने के बाद कांग्रेस ने उनको एक दुधारू गाय की तरह इस्तेमाल किया। वह दशकों से इनका इस्तेमाल कर चुनाव जीतते आई है। 2004 और 2009 के अपने चुनावी मेनिफेस्टो में भी कांग्रेस ने आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने की बात कही थी लेकिन वह कभी उस आरक्षण के बिल को सदन में पास नहीं करा पाई। पास कराना तो दूर वह कभी उस आरक्षण के बिल को सदन में रख भी नहीं पाई। दरअसल यह कांग्रेस की एक चतुराई है जिसके अंतर्गत वह यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि एक बार कोई भी झूठ हवा में फैला कर यह पक्का कर लिया जाए कि उसकी पार्टी वह करने वाली है। धोखे में पड़ कर जनता उसको वोट दे देगी और वह कभी उसको पूरा ही नहीं करेगी। इस एक मामले में भी यही हुआ है।

अभी पिछले वर्ष ही प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के अंतर्गत इस एक बिल को पास किया गया है। जिसमें विभिन्न वर्गों के आरक्षण को बिना हाथ लगाए आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10% आरक्षण की सुविधा दी गई है। यह कानूनी रूप से मजबूत हो इसके लिए सबसे पहले संविधान में संशोधन किया गया है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि अब यह एक कानून बन चुका है। संवैधानिक रूप से भी इसको कोई चुनौती नहीं दे सकता है, लेकिन कांग्रेस पार्टी अपने वकीलों का इस्तेमाल करते हुए इस एक आरक्षण के अमृत को उन वर्गों से छीनना चाहती है।

■ किसान के लिए अलग बजट :

कांग्रेस केवल कोरे चुनावी वादे कर रही है। यह पूरा बजट ऋण में मिली छूट को पूरा नहीं कर सकता है। यूपीए शासन काल के अंदर 2004 से 2014 के दौरान सबसे ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है। इस दौरान कांग्रेसी छाती पीटते हुए कहती रही कि देश के अंदर राजीव गांधी कंप्यूटर लाए थे। लेकिन देश के किसानों को ही उस कंप्यूटर से जोड़ ऑनलाइन ट्रेडिंग की व्यवस्था कांग्रेस ने कभी नहीं कराई। उसमें हमेशा बिचौलियों का खेल चलाते रहना सही समझा क्योंकि इससे उसकी टेबल के नीचे की कमाई होती रहती थी।

दूसरी तरफ मोदी सरकार ने 12 करोड किसानों को प्रति वर्ष ₹6000 की आय सुनिश्चित किया है। फसलों को उसकी लागत का डेढ़ गुना और फसल बीमा के तहत 14 करोड से अधिक बीमा कवर भी किसानों को सुनिश्चित किया है। इसी दौरान 16 करोड मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांटे गए हैं। सिंचाई और इनाम पोर्टल में ऑनलाइन ट्रेडिंग के लिए 50000 करोड़ रुपए निवेश किए गए हैं।

■ मेयर के लिए प्रत्यक्ष चुनाव :

कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में शहर के महापौर की नियुक्ति के लिए प्रत्यक्ष चुनावों का वादा किया है। अगर राहुल गांधी और उनके सलाहकार खबरों पर नजर रखते और गंभीर राजनीति कर रहे होते तो उन्हें पता चलता कि हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर की सरकार इस एक कार्य को पहले ही कर चुकी है। कांग्रेस के घोषणा पत्र में सूचीबद्ध तरीके से यह बताया गया है कि कैसे वह चाहती है कि शहर के महापौर की नियुक्ति प्रत्यक्ष चुनावों से हो। भाजपा ने बहुत लंबे समय से ही यह स्वीकार किया था की महापौर के प्रत्यक्ष चुनाव स्थानीय स्वशासन को मजबूत करेंगे और इस पर भाजपा का दृढ़ता से विश्वास था। भाजपा ने किस कदर उस एक विश्वास को जमीनी स्तर पर उतारा है इसका प्रबल उदाहरण हाल ही में हरियाणा के अंदर हुए मेयर पद के चुनाव थे। जिसमें कांग्रेस को भाजपा ने पूरी तरीके से हरा दिया था। दरअसल बात यह है कि चुनावों को भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस की तरह मजाक में नहीं लेती। वह चुनावों को लेकर बहुत गंभीर रहती है और यही कारण है कि उसके किए हुए वादे जमीन पर उतरते हैं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सिर्फ हवाई फायर ही करती रह जाती है। यह कांग्रेस और राहुल गांधी के मुंह पर एक करारा तमाचा है कि जो वादा वह अपने मेनिफेस्टो में कर रहे हैं वह मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में हरियाणा की सरकार पहले ही कर चुकी है। इसको विचारों का घोटाला कहते हैं। 

■ IRC विश्लेषण :

यह सभी कार्य कांग्रेस अपने कार्यकाल के दौरान कर सकती थी , लेकिन उसकी नियत में कभी जनता की भलाई रही ही भलाई रही ही नहीं। उसने सिर्फ एक तबके को फायदा पहुंचा कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकना ही बेहतर माना है। भाई को भाई से, परिवार को परिवार से लड़ा कर समाज के अंदर विघटन पैदा करना कांग्रेस के राजनीतिक चरित्र को सूट करता रहा है। उसने इस बार भी यही करने का प्रयास किया है।

इस देश की जनता को सावधान होकर अपना प्रतिनिधि चुनना चाहिए। यदि आपने जल्दबाजी में या किसी लालच में आकर गलत व्यक्ति को चुन दिया तो फिर उसका हाल मनमोहन सिंह काल के उसी भ्रष्टाचारी कार्यकाल जैसा होता है जिसके अंतर्गत हिंदुओं को आतंकवादी बताया गया। देश की बहुसंख्यक आबादी को नीचा दिखाया गया। देश में भ्रष्टाचार की लहर चला दी गई। देश के सम्मान को विदेशों में बेच दिया गया। और इसके साथ ही आज एक अपरिपक्व नेता को देश के पंतप्रधान बनाने के पीछे अंधे होकर राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता लगे हुए हैं। इसे आप रोकेंगे! 23 तारीख देश में कर्मयोग के सम्मान का उजाला लेकर आएगी।



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