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राफेल डील पर झूठ बोलने के लिए राहुल गांधी को क्यों पड़ी सुप्रीम कोर्ट की लताड़

by IRC-ADMIN - Apr 15 2019 2:01PM

एक कहावत है कि 'झूठ के पांव नहीं होते'। यही बात राहुल गांधी के ऊपर भी एकदम फिट बैठती है। जिन्होंने इस बार राजनैतिक वैतरणी को पार करने के लिए झूठ का भी सहारा लेना शुरू कर दिया है। राहुल गांधी ने जिस प्रकार से प्रधानमंत्री मोदी को घेरने के लिए भाषा की हर मर्यादाओं को तोड़ा है, वह किसी से छिपा हुआ नहीं है। लेकिन अब वह संवैधानिक मर्यादाओं को तोड़ते हुए संवैधानिक संस्थाओं की कही हुई बातों को लोगों के सामने तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। यहां तक कि अपने इस झूठे प्रपंच के पीछे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं छोड़ा।

माननीय सर्वोच्च अदालत द्वारा राफेल के मुद्दे पर दिए हुए एक आदेश पर उन्होंने ऐसा दिखाया जैसे प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च अदालत ने चोर घोषित कर दिया हो। राहुल गांधी इस समय बहुत उत्सुक हैं प्रधानमंत्री मोदी को किसी भी प्रकार से भ्रष्ट सिद्ध करने के लिए। यह समझा भी जा सकता है क्योंकि खुद राहुल गांधी के परिवार में आधे से ज्यादा लोग भ्रष्ट हैं और उनके ऊपर केस चल रहा है। खुद राहुल गांधी भी नेशनल हेराल्ड घोटाले के मामले में जमानत पर छूटे है।

■ यह था पूरा मामला :

पिछले दिनों राफेल मुद्दे पर चर्चा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन दस्तावेजों को भी दिखाने की बात कही थी जिसको सिक्रेसी एक्ट के कारण सरकार दिखाने में असमर्थ थी। सुप्रीम कोर्ट ने जब वह दस्तावेज मांगे तो सरकार ने सहर्ष स्वीकार करते हुए यह कहा कि वह सर्वोच्च अदालत को वह डॉक्यूमेंट देने के लिए तैयार है। इसके साथ ही एक और दस्तावेज पर काफी तीखी बहस हुई। राफेल मामले में पुनर्विचार याचिका दायर किए हुए याचिकाकर्ताओं ने कुछ दातावेज़ों को आधार बनाया। जिसको सरकार ने यह कहकर अदालत से संज्ञान में ना लेने का आग्ररा किया की वह ओरिजिनल दस्तावेज नहीं है। दस्तावेजों को सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से पुनर्विचार करने के लिए मांगा है। 

■ कहीं भी नहीं हुई राफेल सौदे की बात :

कोर्ट द्वारा कही भी राफेल सौदे की बात हुई ही नहीं। वो सौदे की सच्चाई पर नही, दस्तावेज़ों पर बहस कर रहा है। राफेल विमान और उसके जुड़े हुए सौदे की बात नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट सिर्फ दस्तावेजों की सत्यता पर विचार कर रहा है। यहां तक कि याचिकाकर्ताओं की याचिका को भी अभी तक सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया है। कोर्ट ने सिर्फ इतना कहा है कि वो उन दस्तावेज़ों को भी संज्ञान में लेगा जिसे याचिकाकर्ताओं ने दिया और उसके बाद ही वो इस मुद्दे पर विचार करेगा कि पुनर्विचार याचिका को स्वीकारा जाए या नहीं।

■ रंगे हाथों पकड़े गए राहुल :

अपनी आदत से मजबूर राहुल गांधी को जब इस बारे में पता चला तो उन्होंने इस को किसी भी प्रकार से प्रधानमंत्री मोदी की ओर मोड़ने के अपने कुत्सित प्रयास में एक बहुत बड़ी गलती कर दी। भाषा की मर्यादाओं की सीमा लांग जाने वाले राहुल गांधी ने अब संवैधानिक सीमाओं को लांघते हुए सर्वोच्च अदालत की कही हुई बातों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया। राहुल गांधी ने कहा कि सर्वोच्च अदालत द्वारा दिया गया यह आदेश सीधे रुप से यह बताता है कि देश का चौकीदार चोर है। राहुल गांधी आज कल कुछ ज्यादा ही उत्साहित नजर आ रहे हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि उनके पार्टी के अधिकतर लोग उनको यह समझाते हैं कि वह आने वाले समय के प्रधानमंत्री हैं। राहुल गांधी तो देश के पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने खुद ही अपने आप को प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया है। अब वह उसी प्रधानमंत्री की कुर्सी प्राप्त करने के लिए हर प्रकार की तिकड़म लगा रहे हैं। लेकिन उनके परिवार का पुराना काला अध्याय उनके बीच आ रहा है। चाहे वह भ्रष्टाचार हो, काला धन हो या फिर देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़, हर मोर्चे पर कांग्रेस पार्टी नरेंद्र मोदी के सामने 19 ही नजर आ रही है।

निर्वाचन आयोग द्वारा जिस दिन से देश के अंदर चुनावों की घोषणा की गई, उसी दिन से राहुल गांधी अपने इस झूठ को सत्य साबित करने की हरसंभव प्रयास में लग गए। उसी प्रयास के दौरान राहुल गांधी इतनी बड़ी भूल कर गए।

■ बोला कोर्ट " जवाब दो राहुल!" :

यह सुनने के बाद भारतीय जनता पार्टी की नेता मीनाक्षी लेखी ने सुप्रीम कोर्ट के अंदर एक मानहानि का केस दायर किया है। मीनाक्षी लेखी के केस के अंदर यह बताया गया है कि राहुल गांधी ने सर्वोच्च अदालत का नाम लेते हुए देश के प्रधानमंत्री पर झूठा आरोप लगाया है। मीनाक्षी लेखी के उस एक मानहानि के केस का संज्ञान लेते हुए अब सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को तगड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से इस मामले पर एक हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को 7 दिनों का वक्त देते हुए कहा है कि वह सिद्ध करें कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का नाम लेते हुए आखिर ऐसा किस आधार पर कहा। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने देश के प्रधानमंत्री को लेकर किसी प्रकार की कोई भी टिप्पणी नहीं की है। सुप्रीम कोर्ट अभी सिर्फ दस्तावेजों की जांच कर रहा है। राहुल गांधी से यह भी कहा गया है कि वह उन तथ्यों को लेकर आए जिसके आधार पर उन्होंने ऐसा बयान दिया है।

■ महौल बनाने के प्रयास में जनता से धोखा : 

भारतीय राजनीति के अंदर वह माहौल बनाया जा रहा है जहां हमारे देश का विपक्ष किसी भी प्रकार से सरकार को हटाने का प्रयास कर रहा है। राजनीतिक बिरादरी में कुछ गंभीर लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट की ऐसी टिप्पणी एक बेज्जती समान होती है। इन चुनावों को जीतने के लिए ऐसा लगता है कि कांग्रेस ने लाज शर्म के हर बंधन को तोड़ दिया है। यहां तक कि राजनीतिक मर्यादाओं और संवैधानिक मर्यादाओं की भी लाज रखने में कांग्रेस पार्टी बिल्कुल भी गंभीर नहीं रही है। कांग्रेस पार्टी कहीं कपिल सिब्बल ने तो देश के अधिकारियों को धमकाते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह दिया था कि इस देश के अधिकारी  यह याद रखें  कि कभी सरकार हमारी भी आएगी और तब उनकी  खबर ली जाएगी। कपिल सिब्बल के इस गैर जिम्मेदाराना बयान के ऊपर कोई भी हाय तौबा नहीं मचाया गया लेकिन यह कांग्रेस पार्टी की उस एक राजशाही के चरित्र को दिखा गया जिसके अंतर्गत वह सिर्फ राहुल गांधी को ही इस देश का  राजा मानते हैं ।अब कांग्रेस पार्टी के द्वारा ऐसा गैर जिम्मेदाराना बयान और स्वयं कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी के मुख से ऐसा आधारहीन बयान स्पष्ट रूप से बताता है कि 2019 का चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस हर संभव प्रयास करेगी। प्रेम और राजनीति में सब कुछ जायज है वाली इस एक कहावत को तो जैसे राहुल गांधी ने शायद कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया है। अब चुनाव जीतने के लिए कुछ भी करना चाहते हैं।

■ कांग्रेस के कारण लटकी रही राफेल डील :

जानकारी के लिए आपको बता दें कि राफेल विमान का सौदा भारतीय जनता पार्टी की सरकार के दौरान पूरा हुआ। यह सच है कि कांग्रेस पार्टी के दौरान इस एक महत्वपूर्ण डील को संज्ञान में लाया गया। लेकिन इसको कभी भी फाइनल नहीं किया गया था। इसके पीछे के कारण कांग्रेस पार्टी ही स्पष्ट रूप से बता सकती है कि आखिर इतनी महत्वपूर्ण डील को फाइनल क्यों नहीं किया गया और वह भी पूरे 10 साल। समय बीतने के साथ ही इन विमानों के दाम भी बढ़ते गए और इनके अंदर कई प्रकार के बदलाव आने लगे। जैसे कि तकनीकी हथियारों में अपग्रेडेशन और फ्रांस सरकार की रक्षा नीतियों में बदलाव। हमारे देश की वायु सेना में स्क्वाड्रन की कमी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी, इसीलिए हमारे देश की सेना ने तत्कालीन सरकार से राफेल विमानों की खरीद के लिए आग्रह किया था। लेकिन उसको कभी नहीं खरीदा गया।

 प्रधानमंत्री मोदी की सरकार बनने के बाद इस एक डील को बहुत ही गंभीरता से लेते हुए 36 राफेल विमान की खरीद को फाइनल कर दिया गया।  इस साल के अंत तक यह राफेल विमान देश को मिल भी जाएंगे। लेकिन इसी बात को मुद्दा बनाकर राहुल गांधी देश की सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि देश की सरकार ने 126 विमान की जगह मात्र 36 विमान खरीदे और वह भी बहुत महंगे। राहुल गांधी को शायद आज लॉलीपॉप भी उसी दाम में चाहिए जो 10 साल पहले मिला करते थे। राहुल गांधी है कि समझने को तैयार ही नहीं है।  रक्षा सौदों को लेकर हो रही देरी सिर्फ उसके दाम को ही नहीं बढ़ाती बल्कि उसके अंदर कई ऐसी चीजों को बदलती भी है जिसकी जरूरत एक देश की रक्षा के लिए उसकी सेना को होती है। कांग्रेस पार्टी द्वारा इस समय राष्ट्रहित को राजनीतिक स्वार्थ के लिए बहुत नीचे रखा जा रहा है जो कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।

■ IRC पूछे सवाल : 
◆ आखिर क्यों राहुल गांधी लगातार झूठ बोल रहे हैं?
◆ देश की सुरक्षा से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण सौदे को लेकर राहुल गांधी क्यों बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं?
◆ यदि राहुल गांधी के पास कोई दस्तावेज है तो वह सुप्रीम कोर्ट में जाकर केस क्यों नहीं करते?
◆राहुल गांधी ने किस आधार पर देश के प्रधानमंत्री को चोर बोल दिया?
◆ क्या कांग्रेस पार्टी को देश के संवैधानिक संस्थाओं का आदर करना नहीं आता?
◆ क्या वह एक परिवार को राष्ट्रहित से ऊपर रखती है? देश की सुरक्षा व्यवस्था के मामले में ऐसा गैर जिम्मेदाराना रवैया इतनी पुरानी पार्टी को क्या शोभा देता है?
◆ EVM, निर्वाचन आयोग, CBI जैसी संवैधानिक संस्थाओं को निशाने पर लेने के बाद क्या अब सुप्रीम कोर्ट को भी कांग्रेस पार्टी बिका हुआ बोलेगी?

यह कुछ ऐसे सवाल है जिसका जवाब राहुल गांधी को देना ही पड़ेगा। लेकिन राहुल गांधी का इतिहास देखें तो वह इतने जिम्मेदार तो नहीं है कि वह लोगों के सवालों का जवाब दें। इसलिए यह और भी जरूरी हो जाता है कि हमारे देश की जनता राहुल गांधी की कही हर बात को बहुत गंभीरता से सुने। इसलिए नहीं क्योंकि वह एक परिपक्व नेता हैं। बल्कि इसलिए क्योंकि वह सिर्फ झूठ के आधार पर ही अपनी बातों को रखते हैं। आज सुप्रीम कोर्ट ने उनके झूठ को पकड़ लिया।

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